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जानें WHO के लॉकडाउन प्रोटोकॉल को लेकर वायरल हो रहे मेसेज का सच…

कोविड-19 महामारी (कोरोना वायरस संक्रमण) ने लगभग पूरी दुनिया में कहर मचा रखा है। भारत में भी कोरोना वायरस संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसके साथ ही सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर इस महामारी को लेकर तमाम मेसेज भी वायरल हो रहे हैं, जिसमें से कुछ सही तो कुछ फेक भी हैं।

व्हाट्सऐप, फेसबुक, ट्विटर पर इन दिनों एक मेसेज खूब वायरल हो रहा है। इस मेसेज में लिखा गया है कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) ने दुनिया के सबसे खतरनाक वायरस को कंट्रोल करने के लिए लॉकडाउन पीरियड्स के प्रोटोकॉल और तरीके बताए हैं और भारतीय सरकार इसके अनुसार ही लॉकडाउन घोषित कर रही है।

भारत में 22 मार्च को एक दिन का लॉकडाउन घोषित किया गया था और इसके बाद 24 मार्च की रात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संदेश के दौरान देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा कर दी थी।

इस वायरल मेसेज में दावा किया गया है कि डब्ल्यूएचओ के प्रोटोकॉल और तरीके के मुताबिक खतरनाक वायरस को कंट्रोल करने के लिए पहले एक दिन का लॉकडाउन, फिर 21 दिन का लॉकडाउन फिर पांच दिन के ब्रेक के बाद 28 दिन का लॉकडाउन, फिर पांच दिन के ब्रेक के बाद चौथे चरण में 15 दिन का लॉकडाउन किया जाए।

इस हिसाब से मेसेज में दावा किया गया कि 15 अप्रैल से 19 अप्रैल के बीच लॉकडाउन खत्म कर फिर 20 अप्रैल से 18 मई तक लॉकडाउन किया जाएगा।

डब्ल्यूएचओ साउथ-ईस्ट एशिया के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट किया गया है। इस ट्वीट में कहा गया है, ‘सोशल मीडिया पर डब्ल्यूएचओ के लॉकडाउन के प्रोटोकॉल को लेकर जो मेसेज लगातार शेयर किए जा रहे हैं, वो निराधार और झूठे हैं।

लॉकडाउन को लेकर डब्ल्यूएचओ का कोई प्रोटोकॉल या तरीका नहीं है।’ इस ट्वीट में भारतीय स्वास्थ मंत्रालय, पीआईबी इंडिया और यूएन इंडिया के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट को टैग किया गया है।

आपको बता दें कि कोरोना वायरस संक्रमण के 3500 से ज्यादा मामले भारत में सामने आ चुके हैं, जबकि 83 लोग इस महामारी के चलते अपनी जान गंवा चुके हैं।

पूरी दुनिया में 12 लाख से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं, जबकि 60 हजार से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

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