Donation Scam: राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी, 3 सदस्यीय SIT गठित

अयोध्या । Ram Mandir: अयोध्या की राम नगरी में भगवान श्रीराम मंदिर के दानपात्र की धनराशि में कथित गबन मामले में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। जांच के दौरान सामने आया है कि करीब डेढ़ वर्ष पहले गणना कक्ष में सीसीटीवी कैमरे लगाने का विरोध किया गया था। एक पदाधिकारी ने यह कहते हुए कैमरे लगाने पर आपत्ति जताई थी कि “सब अपने ही लड़के हैं, यहां कैमरा क्यों लगेगा।” हालांकि विरोध के बावजूद कुछ कैमरे लगाए गए और कुछ कैमरों को गुप्त रूप से स्थापित किया गया। बाद में इन्हीं कैमरों की फुटेज ने चढ़ावे की रकम में चोरी करने वाले संदिग्ध कर्मियों के चेहरे उजागर कर दिए।
सूत्रों के अनुसार, जिन कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, वे लंबे समय से एक ही शिफ्ट में नोटों की गिनती का काम करते थे। इस समूह का नेतृत्व मिल्कीपुर निवासी अनुकल्प मिश्रा कर रहा था, जिसे मंदिर प्रबंधन और कुछ प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त होने की बात भी सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि वर्षों तक इन कर्मियों की जिम्मेदारियां नहीं बदली गईं और नोटों की गिनती के बाद बाहर निकलते समय उनकी नियमित तलाशी भी नहीं ली जाती थी। दो शिफ्टों में काम होने के बावजूद संबंधित कर्मचारियों का समूह हमेशा एक साथ ही रखा जाता था।
मामला सामने आने के बाद रामजन्मभूमि परिसर में सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। संदिग्ध कर्मियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और उनकी निशानदेही पर अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियों ने कई संदिग्धों से बड़ी रकम बरामद किए जाने की जानकारी दी है। सूत्रों का कहना है कि जिन कर्मचारियों से रिकवरी हुई है, उनसे अभी भी पूछताछ जारी है और जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि गणना कक्ष के आसपास पुलिस कर्मियों की नियमित ड्यूटी तक नहीं रहती थी। मंदिर में आने वाली नगदी को बैंक तक पहुंचाने का जिम्मा भी बैंक के सुरक्षा कर्मियों के पास था। यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब आंतरिक ऑडिट के दौरान दर्शनार्थियों की संख्या और दानपात्र में जमा रकम के आंकड़ों में बड़ा अंतर पाया गया। इसके बाद जांच शुरू हुई और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्धों की पहचान की गई।
इधर, मंदिर ट्रस्ट की मांग पर राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है। इस टीम में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, किरन एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है। SIT को सात दिनों के भीतर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। अब पूरे देश की नजर इस जांच पर टिकी हुई है कि आखिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में और कौन-कौन से बड़े नाम सामने आते हैं।




