Dhanteras 2026: शुभ मुहूर्त और पूजन विधि, धनतेरस पर इस चीज की खरीदारी से भर जाएगी तिजोरी

Dhanteras 2026: दीपावली से ठीक पहले आने वाले धनतेरस के पावन पर्व का इंतजार आम लोगों से लेकर व्यापारियों तक को बेहद बेसब्री से रहता है।
इस दिन हर कोई अपनी क्षमता और आवश्यकता के अनुसार नई वस्तुओं की खरीदारी जरूर करता है। धनतेरस का न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टिकोण से भी यह दिन बाजार और समृद्धि के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
धन्वंतरि जयंती उत्सव
इस वर्ष धनतेरस एवं भगवान धन्वंतरि जयंती 6 नवंबर शुक्रवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाएगी। इसके अगले दिन यानी 7 नवंबर शनिवार को नरक चतुर्दशी और श्री हनुमान जयंती मनाई जाएगी।
पंडित प्रभात मिश्र के अनुसार धनतेरस के दिन आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि, धन की देवी मां लक्ष्मी और कोष के स्वामी भगवान कुबेर की विशेष पूजा-अर्चना का विधान है।
खरीदारी का महत्व
धनतेरस के शुभ अवसर पर सोना, चांदी, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और घरेलू उपयोग की अन्य चीजें खरीदना बेहद शुभ माना गया है।
ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भूमि, भवन, वाहन और अन्य नई परिसंपत्तियों की खरीदारी करने से पूरे वर्ष घर में सुख, समृद्धि और संपन्नता का वास बना रहता है। इस कारण बाजारों में खरीदारों की भारी चहल-पहल देखी जाती है।
त्रयोदशी तिथि का समय
हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 6 नवंबर शुक्रवार को दिन में 11:06 बजे से हो रही है। इस त्रयोदशी तिथि का समापन 7 नवंबर शनिवार को दिन में 10 बजकर 46 मिनट पर होगा।
तिथियों के इस संयोग के कारण श्रद्धालुओं और खरीदारों को पूजा-अर्चना और खरीदारी के लिए पर्याप्त और शुभ समय मिल रहा है।
शुभ मुहूर्त की समय सीमा
धनतेरस पर खरीदारी करने का सबसे उत्तम और शुभ मुहूर्त 6 नवंबर शुक्रवार को दिन में 11:06 बजे से शुरू होकर 7 नवंबर शनिवार को दिन में 10:46 बजे तक रहेगा।
इस दौरान दोनों ही दिन खरीदारी करना अत्यंत फलदायी और शुभप्रद माना गया है। इसके अलावा मां लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा भी इस पूरी समयावधि में कभी भी संपन्न की जा सकती है।
सरल पूजन विधि
धनतेरस के दिन शाम के समय शुभ मुहूर्त में भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर जी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा शुरू करनी चाहिए। सबसे पहले घी का दीपक जलाएं और पुष्प, चंदन, अक्षत तथा कमल का फूल अर्पित करें।
इसके बाद श्रीसूक्त, कनकधारा स्तोत्र, अन्नपूर्णा स्तोत्र और विष्णु सहस्रनाम का भक्तिभाव से पाठ करना अत्यंत कल्याणकारी होता है।
भोग और अर्पण
पूजन के दौरान भगवान कुबेर और माता लक्ष्मी को सफेद रंग के मिष्ठान्न का भोग लगाना चाहिए। वहीं आरोग्य के देवता धन्वंतरि जी को पीले रंग की मिठाई का भोग अर्पित करने का विशेष महत्व है। इस विधि-विधान से पूजा करने पर घर-परिवार में निरोगी काया के साथ-साथ धन और धान्य की कभी कोई कमी नहीं रहती है।




