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रायपुर वीआईपी तिराहे पर हादसा:कराटे क्लास से बेटी को लेकर मां स्कूटी से घर जा रही थी, बेकाबू कंटेनर ने रौंदा, दोनों की मौत

राजधानी रायपुर के वीआईपी तिराहे पर रविवार सुबह 10 बजे कंटेनर ने मोपेड सवार मां-बेटी को रौंद दिया। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद चालक कंटेनर छोड़कर भाग निकला। पुलिस ने वाहन जब्त कर लिया है। गंगा साहू (35) अपनी 9 साल की बेटी रितिका को कराटे क्लास से लेकर टेमरी लौट रही थी। देर शाम पोस्टमार्टम के बाद दोनों का अंतिम संस्कार किया गया।

घटना से गांव में मातम छाया है। इस हादसे ने एक बार फिर राजधानी में सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाओं की रोकथाम के इंतजामों पर सवाल खड़े किए हैं। तेलीबांधा टीआई अजय झा ने बताया कि टेमरी निवासी गौरीशंकर साहू निजी वाहन चलाते हैं। गंगा से उनकी शादी 14 साल पहले हुई थीं।

उनकी दो बेटियां थीं। बड़ी बेटी लवली (11) और छोटी बेटी रितिका (9) तीसरी कक्षा में पढ़ती थी। रविवार सुबह गंगा रितिका को कराटे क्लास से लेने गई थीं। इसके बाद दोनों मोपेड से वीआईपी रोड होते हुए टेमरी लौट रही थीं।

वीआईपी तिराहे के पास पीछे से आए कंटेनर ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। दोनों पहियों के नीचे आ गईं और मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के बाद चालक वाहन छोड़कर भाग गया। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू की। परिजनों के मुताबिक, रितिका पढ़ाई के साथ खेलकूद में भी अच्छी थी।

उसने कराते में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। वह रविवार को भी क्लास गई थी। उसका सपना नेशनल स्तर पर खेलना था। मां-बेटी की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिवार की मौजूदा आर्थिक स्थिति और बड़ी बेटी लवली की पढ़ाई व देखभाल को लेकर विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।

17 दिन में दो हादसे

तेलीबांधा थाना क्षेत्र में 17 दिनों के भीतर यह दूसरा जानलेवा हादसा है। इससे पहले 9 अक्टूबर की सुबह एक्सप्रेस-वे ब्रिज के नीचे दोस्त के अंतिम संस्कार में जा रहे एक बुजुर्ग को ट्रक ने चपेट में ले लिया था। हादसे में बुजुर्ग की मौत हो गई थी, जबकि उनका साथी घायल हो गया था।

रायपुर में हाईवे-आउटर की सड़कें सबसे खतरनाक, 9 महीने में 390 मौतें

राजधानी रायपुर में सड़क हादसों पर लगाम नहीं लग रही है। पिछले 9 महीनों में 1230 हादसों में 390 लोगों की मौत हुई है। हाईवे और आउटर की सड़कें सबसे खतरनाक बनी हुई हैं। इस साल जनवरी से मार्च तक बिलासपुर में 840 हादसों में 93, दुर्ग में 414 हादसों में 89, रायगढ़ में 200 हादसों में 107 और बलौदाबाजार में 194 हादसों में 104 लोगों की जान गई।

ब्लैक स्पॉट सुधार के दावे, लेकिन खतरे पर सवाल: शासन के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2016 से 2026 तक 1342 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए थे। इनमें से 1061 में सुधार का दावा किया गया है। कुछ स्थानों पर काम जारी है, जबकि 30 से अधिक स्थानों पर सुधार अधूरा है। वर्ष 2026 में प्रदेश में 190 ब्लैक स्पॉट दर्ज किए गए हैं।

इनमें 139 नेशनल हाईवे, 27 स्टेट हाईवे और 24 अन्य सड़कों पर हैं। जिलावार स्थिति में सरगुजा 30 ब्लैक स्पॉट के साथ पहले, रायपुर 26 के साथ दूसरे, कोरबा 18 के साथ तीसरे, रायगढ़ 16 के साथ चौथे और जांजगीर-चांपा 14 के साथ पांचवें स्थान पर है।

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