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बैंक में काम करने वाला निकला पाकिस्तानी जासूस:भोपाल में गर्लफ्रेंड बनाई, शादी से पहले पुलिस ने पकड़ा

2002 से 2004 के बीच देश कई बम धमाकों और आतंकी साजिशों से दहल चुका था। दिसंबर 2002 से मार्च 2003 के बीच मुंबई में बसों, रेलवे स्टेशनों और लोकल ट्रेनों को निशाना बनाकर धमाके किए गए। सुरक्षा एजेंसियां संदिग्धों और उनके नेटवर्क की तलाश में जुटी थीं।

इसी दौर में भोपाल में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने पुलिस को चौंका दिया। यहां सिटी बैंक में काम करने वाला एक युवक सामान्य जिंदगी जी रहा था।

उसके पास भारतीय पहचान से जुड़े दस्तावेज थे, नौकरी थी और शादी की तैयारी भी चल रही थी। सगाई हो चुकी थी। लेकिन पुलिस को शक था कि उसकी असली पहचान कुछ और है।

जिस युवक को लोग अब्दुल समी या समीर के नाम से जानते थे, पुलिस उसे पाकिस्तानी जासूस साजिद मुनीर मान रही थी।

मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स में आज कहानी उस युवक की, जिसने भोपाल में पहचान बनाई, बैंक में नौकरी की और शादी करने जा रहा था। फिर एक दिन इंटरनेट कैफे में पहुंची क्राइम ब्रांच ने उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी पहेली खोल दी।

25 मई 2004 को भोपाल में रात के करीब 8 बजे थे। स्टेट बैंक चौराहे के पास रोज की तरह आवाजाही थी। करीब 25-26 साल का एक युवक तेजी से आगे बढ़ा और कुछ दूर चलने के बाद इंटरनेट कैफे में दाखिल हो गया।

वह कंप्यूटर के सामने बैठा और सिस्टम चालू कर कुछ टाइप करने लगा। उसे अंदाजा नहीं था कि दो लोग लगातार उस पर नजर रख रहे हैं। कुछ देर बाद दोनों कैफे में पहुंचे और अचानक उसे पकड़ लिया।

पाकिस्तान जासूस से मिला था सुराग

पूछताछ में युवक ने अपना नाम अब्दुल समी बताया। उसने कहा कि वह गांधी नगर में रहता है और सिटी बैंक में कंप्यूटर ऑपरेटर है। लेकिन पुलिस यहां किसी सामान्य अपराधी को पकड़ने नहीं आई थी।

उसे सूचना मिली थी कि पाकिस्तानी जासूस साजिद मुनीर भोपाल में छिपकर रह रहा है। राजस्थान में एजाजुल हसन नाम का एक पाकिस्तानी जासूस पकड़ा गया था।

पुलिस के मुताबिक, हसन ने पूछताछ में मुनीर के भोपाल में होने की जानकारी दी थी। अब पुलिस को संदेह था कि कैफे में पकड़ा गया अब्दुल समी ही साजिद मुनीर है।

ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड और वोटर आईडी भी मिला

पूछताछ के दौरान समी खुद को भोपाल का निवासी बताता रहा। उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड और वोटर आईडी कार्ड था। दस्तावेजों में गांधी नगर का पता और पिता के नाम के स्थान पर अब्दुल सलाम लिखा था।

गिरफ्तारी के दौरान मौजूद नीरज शाहनी ने भी पुलिस को बताया कि समी गांधी नगर में अब्दुल सलाम के घर रहता है। पुलिस ने इसके बाद उस घर पर छापा मारा।

तलाशी में एमपीईबी स्मार्ट कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, लाल रंग की कार की तस्वीर वाली एक कॉपी, सिटी बैंक से संबंधित आवेदन मिला। साथ ही भोपाल नगर निगम का राशन कार्ड, हरियाणा सरकार का राशन कार्ड और अब्दुल सलाम का शपथ पत्र भी मिला।

फर्जी डॉक्यूमेंट के लिए लिया रिश्ते का सहारा

पुलिस की जांच अब्दुल सलाम के परिवार तक पहुंची। सलाम की पत्नी अफसाना ने बताया कि कुछ समय पहले उनके पति अब्दुल समी को घर लेकर आए थे। उन्होंने बताया था कि समी उनकी पहली पत्नी का बेटा है, जो पहले बेंगलुरु में रहता था और कुछ महीने पहले भोपाल आया है।

यानी परिवार के सामने समी की पहचान अब्दुल सलाम के बेटे के रूप में पेश की गई थी। पुलिस को संदेह था कि इसी रिश्ते का इस्तेमाल भारतीय दस्तावेज बनवाने के लिए किया गया।

जांच में सामने आया कि दस्तावेज वर्ष 2003 में बनवाए गए थे। पुलिस के मुताबिक, पहले राशन कार्ड में नाम जुड़वाया गया। इसके बाद शपथ पत्र के आधार पर निवास संबंधी दस्तावेज तैयार कराए गए और फिर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया गया।

भोपाल में गर्लफ्रेंड, सगाई भी हो चुकी थी

मामले की जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि मुनीर की भोपाल में गर्लफ्रेंड भी थी और दोनों की शादी की बातचीत चल रही थी। पुलिस शबा बेगम (बदला हुआ नाम) तक पहुंची। उन्होंने बताया कि वह मुनीर को समीर नाम से जानती थीं।

अब्दुल सलाम उसे अपना बेटा बताता था। एक बार सलाम मुनीर को लेकर उनके घर आया और अपनी बेटी सायना(बदलाा हुआ नाम) से उसका रिश्ता करने की बात कही। उस समय शबा ने यह कहकर रिश्ता करने से मना कर दिया कि लड़का कुछ कमाता नहीं है।

बाद में मुनीर की सिटी बैंक में नौकरी लग गई। इसके बाद शादी की बातचीत दोबारा शुरू हुई और सायना की उससे सगाई हो गई। सायना ने भी पुलिस को इसकी पुष्टि की। जिस युवक की पहचान पर पुलिस को शक था, वह एक परिवार का होने वाला दामाद बन चुका था।

पहले चपरासी बना, फिर कंप्यूटर ऑपरेटर

पुलिस की जांच में सामने आया कि मुनीर ने एक एजेंसी के जरिए बैंक में पहले चपरासी की नौकरी हासिल की थी। कंप्यूटर चलाना आने के कारण बाद में उसे कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर काम करने का मौका मिला।

सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि उसके पास वोटर आईडी कार्ड भी था। पुलिस के मुताबिक, उसने 2004 के लोकसभा चुनाव में मतदान भी किया था। यानी जिस युवक को पुलिस पाकिस्तानी जासूस साजिद मुनीर मान रही थी, वह भारतीय मतदाता के रूप में भी दर्ज था।

जांच में दस्तावेज फर्जी तरीके से तैयार कराए जाने की पुष्टि होने की बात सामने आई, लेकिन मुनीर खुद को पाकिस्तानी होने से इनकार करता रहा।

 

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