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भरण-पोषण के दायरे में मंत्री,सांसद विधायक भी

भोपाल। मप्र सरकार ने बुढ़े-माता-पिता कि सेवा के शासकीय कर्मचारियों के वेतन से 10 फीसदी हिस्सा उनके देखरेख के लिए काटा जाएगा। जिसका जमकर विरोध हो रहा है क्योंकि इस नियम से सांसद, विधायक बाहर हैं। लेकिन सरकार ने भरण-पोषण नियम को लेकर नए सिरे से विचार शुरू कर दिया है। इसमें लोक सेवक मंत्री, विधायक, सांसद को भी दायरे में लाया जा सकता हैं। सामाजिक न्याय मंत्री गोपाल भार्गव का कहना है कि इसके लिए संशोधन विधेयक भी लाया जा सकता है। साथ ही केन्द्रीय कर्मचारियों के लिए केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। मध्यप्रदेश में माता-पिता की देखभाल न करने की शिकायत प्रमाणित होने पर अधिकारियों-कर्मचारियों के वेतन से अधिकतम दस फीसदी हिस्सा काटने का नियम बनाया गया। सामाजिक न्याय विभाग ने अधिसूचना जारी कर इसे लागू भी कर दिया है। तभी से ये सवाल उठ रहे है कि लोक सेवक इस कानून के दायरे में क्यों नहीं हैं, जबकि इन्हें तो पहले कानून के दायरे में लाकर उदाहरण प्रस्तुत किया जाना चाहिए।