इस साल मानसून में 12.6% कम बारिश:खेती, पानी और बिजली पर बड़ा असर; महाराष्ट्र के 305, कर्नाटक के 217 तालुका सूखाग्रस्त

इस साल मानसून में सामान्य से 12.6% कम बारिश हुई। दक्षिण और पूर्वी भारत के कई इलाकों में सूखे से खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचा। महाराष्ट्र के 305, कर्नाटक के 217 तालुका सूखाग्रस्त घोषित हुए। अब रबी की फसलों पर भी संकट है। 16 अक्टूबर तक रबी की बोनी पिछले साल से 26% पीछे थी।
कम बारिश से जलाशयों में भी पानी घटा है। देश के 178 प्रमुख जलाशयों की एक तिहाई से ज्यादा क्षमता 22 अक्टूबर को खाली थी। इससे सिंचाई-बिजली उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। सितंबर में पनबिजली उत्पादन 20% घटा। बिजली की मांग व आपूर्ति में 56 करोड़ यूनिट का अंतर रहा, जो अगस्त 2023 के बाद सर्वाधिक है।
फसल: धान का रकबा 4%, अनाज लक्ष्य 26 लाख टन कम
खरीफ का रकबा 1,118.9 लाख हेक्टेयर से घटकर 1,103.9 लाख हेक्टेयर रह गया। धान का रकबा 4% और मक्का का 3% घटा। केंद्र सरकार ने 2026-27 के लिए खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य 37 करोड़ 39 लाख 30 हजार टन रखा है। यह पिछले साल के वास्तविक उत्पादन से 26.30 लाख टन कम है।
बिजली: बैकअप कमजोर पड़ा, पीक आवर्स में कट लग सकते हैं
पनबिजली उत्पादन 20% घटा है। इससे ज्यादा मांग के समय बिजली आपूर्ति बनाए रखना मुश्किल।
- चिंता क्यों: सितंबर में थर्मल प्लांटों ने 3% ज्यादा उत्पादन किया। अप्रैल-सितंबर में कोयला भंडार 66% घटा, जो 4 साल की सबसे तेज गिरावट है। 96 प्लांटों में 3 दिन से भी कम का कोयला बचा है।
- असर क्या: सर्दियों में कई राज्यों में कटौती हो सकती है। बाजार में कीमतें भी तेजी से बढ़ सकती हैं।
पानी: पीने और सिंचाई के लिए उपलब्धता में कटौती की आशंका
सीडब्ल्यूसी के मुताबिक, बुधवार को देश के 178 प्रमुख जलाशयों में क्षमता का 66.70% पानी था।
- चिंता क्यों: जलाशयों में पानी पिछले साल से 44% व 10 साल के औसत से 18.43% कम है। दक्षिण भारत में सिर्फ 42.34% पानी बचा है।
- असर क्या: पनबिजली वाले 20 में से 12 जलाशयों में पानी सामान्य स्तर पर या उससे कम है। सिंचाई, पेयजल व बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकते हैं।
262 जिलों में योजनाएं अपडेट
262 जिलों की कृषि योजनाएं अपडेट की गईं। आईसीएआर ने कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए अल-नीनो प्रबंधन दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
बारिश, जलाशयों, बुआई और खाद-बीज की साप्ताहिक निगरानी। 112 थर्मल प्लांट्स को अधिकतम उत्पादन और पर्याप्त कोयला भंडार रखने के निर्देश हैं।




