सूरजपुर हत्याकांड के दोषियों को फांसी देने जल्लाद बनने तैयार:पुलिस कर्मचारी संघ के अध्यक्ष ने CM को लिखा पत्र, फांसी देने की जताई इच्छा

छत्तीसगढ़ में सूरजपुर के मां-बेटी हत्याकांड के दोषियों को फांसी की सजा देने के लिए जल्लाद की व्यवस्था करने की मांग उठी है। संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्ज्वल दीवान ने खुद जल्लाद बनने की इच्छा जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री और गृहमंत्री को पत्र लिखकर यह मांग रखी है।
उज्ज्वल दीवान ने अपने पत्र में रेप-मर्डर के दोषियों कुलदीप साहू, चंद्रकांत चौधरी और रिंकू विश्वकर्मा को फांसी पर चढ़ाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यदि दोषियों को फांसी दी जाती है, तो वे बिना पैसे लिए जल्लाद बनने के लिए तैयार हैं। उन्होंने इस पेशकश के जरिए पुलिस परिवार के प्रति अपनी संवेदना जताई और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग की।
बता दें कि 14 अक्टूबर 2024 को हेड कॉन्स्टेबल की पत्नी के साथ दुष्कर्म के बाद उनकी और बेटी की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में स्पेशल कोर्ट ने तीन दोषियों को फांसी और चौथे आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

पुलिस परिवार की सुरक्षा और सम्मान का मुद्दा उठाया
उज्जवल दीवान ने कहा कि पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मामलों को गंभीरता से लेना चाहिए। कोई गंभीर अपराध होता है, तो पीड़ितों को न्याय मिलना जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से इस मामले में जरूरी कदम उठाने की मांग की है।
‘कानून के तहत हो फांसी की सजा पर अमल‘
उज्जवल दीवान ने CM और गृहमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि फांसी की सजा तय कानूनी प्रक्रिया के तहत और सक्षम अधिकारियों की निगरानी में ही दी जाती है। उनका मकसद पुलिस परिवार के साथ खड़े रहना, पीड़ितों के प्रति संवेदना जताना और उन्हें न्याय दिलाने की मांग सरकार तक पहुंचाना है। उनके इस पत्र के बाद छत्तीसगढ़ में फांसी की सजा देने के लिए जल्लाद की व्यवस्था करने की मांग उठी है।
कौन है उज्ज्वल दीवान
- साल 2010 में धमतरी जिला पुलिस बल में आरक्षक के पद पर भर्ती हुए।
- बाद में पुलिस की नौकरी से इस्तीफा दे दिया
- पुलिस कर्मचारियों के अधिकारों की आवाज उठाने पर राजद्रोह और पुलिस द्रोह के मामले दर्ज होने का दावा किया।
- उज्ज्वल दीवान के पिता पुलिस विभाग में हेड कॉन्स्टेबल के पद से सेवानिवृत्त हुए।
- साल 2023 में आजाद जनता पार्टी के अध्यक्ष के रूप में राजनीतिक गतिविधियों में शामिल हुए।
- वर्तमान में संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष हैं।
पुलिस परिवार की सुरक्षा और सम्मान का मुद्दा उठाया
उज्जवल दीवान ने कहा कि पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मामलों को गंभीरता से लेना चाहिए। कोई गंभीर अपराध होता है, तो पीड़ितों को न्याय मिलना जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से इस मामले में जरूरी कदम उठाने की मांग की है।
‘कानून के तहत हो फांसी की सजा पर अमल‘
उज्जवल दीवान ने CM और गृहमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि फांसी की सजा तय कानूनी प्रक्रिया के तहत और सक्षम अधिकारियों की निगरानी में ही दी जाती है। उनका मकसद पुलिस परिवार के साथ खड़े रहना, पीड़ितों के प्रति संवेदना जताना और उन्हें न्याय दिलाने की मांग सरकार तक पहुंचाना है। उनके इस पत्र के बाद छत्तीसगढ़ में फांसी की सजा देने के लिए जल्लाद की व्यवस्था करने की मांग उठी है।
कौन है उज्ज्वल दीवान
- साल 2010 में धमतरी जिला पुलिस बल में आरक्षक के पद पर भर्ती हुए।
- बाद में पुलिस की नौकरी से इस्तीफा दे दिया
- पुलिस कर्मचारियों के अधिकारों की आवाज उठाने पर राजद्रोह और पुलिस द्रोह के मामले दर्ज होने का दावा किया।
- उज्ज्वल दीवान के पिता पुलिस विभाग में हेड कॉन्स्टेबल के पद से सेवानिवृत्त हुए।
- साल 2023 में आजाद जनता पार्टी के अध्यक्ष के रूप में राजनीतिक गतिविधियों में शामिल हुए।
- वर्तमान में संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष हैं।
13 अक्टूबर 2024 को हुई थी मां-बेटी की हत्या
घटना 13 अक्टूबर 2024 की है। सूरजपुर थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी 12 वर्षीय बेटी की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद मां-बेटी के शव घर से करीब पांच किलोमीटर दूर फेंक दिए गए थे।
बेटी पर 28, मां पर 33 बार किया चाकू से वार
मामले की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के मुताबिक, बच्ची के शरीर पर चाकू से 28 वार किए गए थे, जबकि उसकी मां पर 33 बार वार किया गया था। जांच में आरोपियों के फिंगरप्रिंट और कपड़ों पर मिले खून के नमूनों को अहम सबूत माना गया। डीएनए जांच से महिला के साथ रेप की पुष्टि हुई थी। जांच में बच्ची के साथ भी दुष्कर्म की पुष्टि होने की बात सामने आई थी।
बेटी पर 28, मां पर 33 बार किया चाकू से वार
मामले की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के मुताबिक, बच्ची के शरीर पर चाकू से 28 वार किए गए थे, जबकि उसकी मां पर 33 बार वार किया गया था। जांच में आरोपियों के फिंगरप्रिंट और कपड़ों पर मिले खून के नमूनों को अहम सबूत माना गया। डीएनए जांच से महिला के साथ रेप की पुष्टि हुई थी। जांच में बच्ची के साथ भी दुष्कर्म की पुष्टि होने की बात सामने आई थी।
चारों आरोपियों को ठहराया था दोषी
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 29 सितंबर 2026 को कुलदीप साहू समेत चारों आरोपियों को हत्या, रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराया था। इसके बाद अदालत ने सजा सुनाने के लिए 8 अक्टूबर की तारीख तय की थी।
फिंगरप्रिंट, खून के नमूने और DNA जांच बने अहम साक्ष्य
मामले की जांच में फिंगरप्रिंट, कपड़ों पर लगे खून के नमूने और डीएनए जांच जैसे सबूतों की अहम भूमिका रही। जांच के दौरान महिला और बच्ची के साथ हुई वारदात से जुड़े सबूत जुटाए गए। इसके बाद मामला अदालत में पहुंचा, जहां करीब दो साल तक सुनवाई चली।
अदालत ने 29 सितंबर को चारों आरोपियों को दोषी ठहराया था। अब 8 अक्टूबर 2026 को सजा का ऐलान करते हुए तीन दोषियों को मृत्युदंड और एक दोषी को मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।


