छत्तीसगढ़

मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा:स्कूलों में 8वीं तक अंग्रेजी बोलना-लिखना जरूरी, गैर-बोर्ड की कॉपियां दूसरे स्कूल में जांचेंगे

स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक पास करने की बाध्यता के चलते बच्चों में पढ़ने-लिखने की दक्षता कम हो गई है। इस कारण छत्तीसगढ़ के स्कूलों में अब पहली से पांचवीं तक हिंदी लिखने और बोलने की अनिवार्यता लागू की जा रही है। वहीं, मिडिल स्कूलों में 6वीं से 8वीं तक अंग्रेजी लिखने और बोलने की अनिवार्यता होगी। इस प्रणाली को लागू करने के लिए पहले प्रदेशभर के शिक्षकों को अंग्रेजी की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके बाद ये शिक्षक बच्चों को अंग्रेजी सिखाएंगे।

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मंगलवार शाम दैनिक भास्कर कार्यालय में चर्चा के दौरान स्कूल शिक्षा में किए जा रहे विभिन्न बदलावों को लेकर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि निर्धारित स्तर हासिल नहीं होने पर संबंधित स्कूल के शिक्षकों पर कार्रवाई होगी। इसके लिए पहले शिक्षकों को अंग्रेजी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मंत्री ने यह भी बताया कि बंद होने की कगार पर पहुंचे इग्नाइट स्कूलों को विवेकानंद योजना के तहत दोबारा शुरू किया जाएगा।

इनका संचालन पीपीपी मॉडल पर होगा और ये पूरी तरह अंग्रेजी माध्यम के स्कूल बने रहेंगे। दिसंबर तक स्कूलों में स्मार्ट क्लास की सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी। जिन स्कूलों में शिक्षक नहीं होंगे, वहां ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जाएंगी। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए बोर्ड कक्षाओं को छोड़कर अन्य कक्षाओं की उत्तरपुस्तिकाएं भी अब दूसरे स्कूलों में जांची जाएंगी। अभी तक जिस स्कूल में बच्चा पढ़ता है, वहीं के शिक्षक उसकी उत्तरपुस्तिका जांचते थे। उन्होंने कहा, ‘स्कूलों में मंत्रोच्चार शुरू करने का असर गांवों तक दिखाई दे रहा है। मैं कवर्धा के एक स्कूल में गया था।

वहां बच्चों के साथ ग्रामीणों ने भी मंत्रोच्चार सीख लिया है। शिक्षकों का कहना है कि इससे स्कूल में सकारात्मकता बढ़ी है।’ यादव ने कहा कि उनका लक्ष्य सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर इतना बेहतर करना है कि गरीब अभिभावकों को पेट काटकर अपने बच्चों को निजी स्कूलों में न भेजना पड़े और बड़े अधिकारी भी अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में कराएं।

उन्होंने बताया कि युक्तियुक्तकरण से स्कूलों की व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। इसके तहत स्थानांतरित किए गए जिन शिक्षकों ने दोबारा तबादले के लिए आवेदन किया था, उनके आवेदन रोक दिए गए हैं। प्रदेश में नई शिक्षा नीति को भी पूरी तरह लागू किया जा रहा है।

रायपुर में भी खुलेगा सुपर-80: दुर्ग में सुपर-80 की शुरुआत की गई है। इसमें प्रवेश के लिए आयोजित परीक्षा में 691 विद्यार्थी शामिल हुए थे, जिनमें से 80 का चयन किया गया है। चयनित विद्यार्थी आवासीय विद्यालय में रहकर नीट और जेईई की तैयारी करेंगे। शिक्षा मंत्री ने बताया कि अगले दो महीने में रायपुर में भी सुपर-80 शुरू किया जाएगा। सरकार की योजना प्रत्येक संभाग में एक सुपर-80 खोलने की है। यहां श्रेष्ठ सरकारी शिक्षकों के साथ प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थानों के शिक्षक भी विद्यार्थियों को पढ़ाएंगे।

आत्मानंद स्कूलों में 5000 संविदा शिक्षक होंगे भर्ती

आत्मानंद स्कूलों को सुदृढ़ करने के लिए 5000 संविदा शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। अभ्यर्थियों का चयन ऑनलाइन परीक्षा के माध्यम से होगा। परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों को इन स्कूलों में पढ़ाने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा 5000 नियमित शिक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया जा चुका है। ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था लागू होने के बाद दूसरे कार्यालयों में संलग्न 10,600 शिक्षक भी स्कूल लौट आए हैं। ये शिक्षक कलेक्टोरेट और संभागायुक्त कार्यालय सहित विभिन्न जगहों पर अटैच थे। वर्तमान में करीब 85 प्रतिशत शिक्षक ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

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