बृजमोहन-अमित कटारिया विवाद, लोकसभा स्पीकर ने मांगा फैक्टुअल नोट:फोन पर ‘जो करना है कर लो’ कहने का आरोप;भूपेश बोले-लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए मामला गंभीर

रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया के बीच कथित फोन बातचीत का मामला अब लोकसभा पहुंच गया है। भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर स्वास्थ्य सचिव पर विशेषाधिकार हनन का आरोप लगाया है।
बृजमोहन अग्रवाल का दावा है कि फोन पर बातचीत के दौरान अमित कटारिया ने उनसे ‘जो करना है कर लो’ कहा और मिसबिहेव किया। मामले में लोकसभा सचिवालय ने एक्शन लेते हुए कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय से मामले पर हिंदी और अंग्रेजी में फैक्टुअल नोट मांगा है, ताकि इसे लोकसभा अध्यक्ष के सामने रखा जा सके।

इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी बृजमोहन अग्रवाल के समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर एक प्रशासनिक अधिकारी के इस कथित व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी प्रशासनिक अधिकारी का व्यवहार किसी सांसद के साथ इस तरह का हो सकता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है।
कई महीनों तक जवाब नहीं मिलने का आरोप
बृजमोहन अग्रवाल ने अपनी शिकायत में कहा है कि वे स्वास्थ्य विभाग से जुड़े जनहित के मुद्दों और अपने संसदीय क्षेत्र की समस्याओं को लेकर लगातार स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया को पत्र और स्मरण पत्र भेज रहे थे, लेकिन कई महीनों तक कोई जवाब नहीं मिला।
बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि यह एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के प्रति गैर-जिम्मेदाराना रवैया है और संविधान के अनुच्छेद-105 के तहत मिले उनके विशेषाधिकारों का भी उल्लंघन है।
पढ़ें शिकायत की कॉपी-

20 मई की फोन कॉल पर विवाद
शिकायत के अनुसार, 20 मई की शाम सांसद ने स्वास्थ्य सचिव की कार्यशैली की शिकायत मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह से की थी। सांसद का दावा है कि इसके बाद प्रमुख सचिव ने अमित कटारिया को उनसे तुरंत बात करने के निर्देश दिए।
बृजमोहन अग्रवाल के मुताबिक, उसी शाम अमित कटारिया का फोन आया। बाद में जब उन्होंने कॉल बैक कर लंबित मामलों की जानकारी मांगी, तब बातचीत के दौरान स्वास्थ्य सचिव का व्यवहार कथित तौर पर रूखा और अपमानजनक था।
सांसद ने आरोप लगाया कि इसी दौरान अमित कटारिया ने उनसे ‘जो करना है कर लो’ कहा।
कार्रवाई की मांग
शिकायत में सांसद ने इसे एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के आचरण के विपरीत बताते हुए मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजने और सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की मांग की है।
लोकसभा सचिवालय ने मांगी रिपोर्ट
शिकायत मिलने के बाद लोकसभा सचिवालय ने कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय को पत्र भेजकर पूरे मामले पर जल्द फैक्टुअल नोट मुहैया कराने को कहा है। सचिवालय ने यह भी पूछा है कि क्या इस रिपोर्ट की एक कॉपी सांसद को भी मुहैया कराई जा सकती है।
भूपेश बोले- यह मतदाताओं का भी अपमान
वहीं, इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि बृजमोहन अग्रवाल से वैचारिक असहमति हो सकती है, लेकिन वे जनता के चुने हुए लोकसभा सांसद हैं।
उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रशासनिक अधिकारी का व्यवहार किसी सांसद के साथ इस तरह का हो सकता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है। उन्होंने इसे उन मतदाताओं का भी अपमान बताया, जिन्होंने अपने प्रतिनिधि को चुनकर संसद भेजा है।
साथ ही तंज कसते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश की कमान दिल्ली और नागपुर के हाथों में होने के कारण अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों की बात की परवाह नहीं रह गई है।




