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31 दिसंबर तक सभी वयस्कों के वैक्सीनेशन का लक्ष्य कैसे हासिल करेगा भारत?

नई दिल्ली. भारत ने 16 जनवरी को कोविड -19 रोधी टीकाकरण (Vaccination In India) अभियान शुरू किया. इस छह महीने में, अधिकतर मोर्चों पर सुधार दिखाई दिया है, जैसे वैक्सीनेशन की स्पीड बढ़ी, महिला-पुरुष और शहरी-ग्रामीण आबादी के टीकाकरण का अंतर कम हो रहा है. इन सबके बावजूद भारत को अगर इस साल दिसंबर 2021 तक सभी 94 करोड़ वयस्क लोगों का वैक्सीनेशन करना है तो और भी बहुत कुछ करना होगा. केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर तक भारत की पूरी वयस्क आबादी का टीकाकरण करने का लक्ष्य रखा है. 22 जुलाई की शाम 6 बजे तक 8.78 करोड़ लोगों को पूरी तरह से टीका लगाया जा चुका है और 24.22 करोड़ लोगों को कम से कम एक खुराक मिल चुकी है. राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग के अनुमान के अनुसार 1 मार्च को भारत की वयस्क जनसंख्या 94 करोड़ है. इसका मतलब है कि 65 फीसदी वयस्क आबादी को अब तक टीकों की एक भी खुराक नहीं मिली है.

अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार भले ही प्रतिदिन 43.2 लाख लोगों (20 जुलाई तक) को पहली खुराक देने की वर्तमान दर को बनाए रखा जाए, इससे 31 दिसंबर तक पूरी आबादी को टीकाकरण का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाएगा. हालांकि, अगस्त से सप्लाई में वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे वैक्सीनेशन में तेजी संभव हो पाएगी.

भारत में वैक्सीन सप्लाई के चरण
भारत की वैक्सीन सप्लाई पॉलिसी कई चरणों से गुजरी है. पहले तीन चरणों में स्वास्थ्य कर्मियों, फ्रंट लाइन वर्कर्स और 60 वर्ष से अधिक या 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए टीकाकरण शुरू किया गया था. तीनों में, केंद्र सरकार द्वारा राज्यों और निजी केंद्रों को टीकों की आपूर्ति और आपूर्ति की गई थी. 1 अप्रैल से, 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए टीकाकरण शुरू किया गया. इस फेज में भी केंद्र सरकार द्वारा राज्यों और निजी केंद्रों को टीके खरीदे और आवंटित किए गए थे. 1 मई से, भारत ने 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों के लिए टीकाकरण की शुरुआत कर दी. हालांकि इस दौरान वैक्सीन की सप्लाई और डिमांड में भारी अंतर रहा.

इसके बाद केंद्र सरकार ने 21 जून से 75% टीकों की जिम्मेदारी अपने हाथों में ले ली. हालांकि निजी क्षेत्र द्वारा की जा रही 25% की खरीद को जारी रखा गया. रिपोर्ट के अनुसार इसके बाद वैक्सीनेशन के सात दिन का औसत 26 जून को 63.9 लाख के उच्च स्तर पर पहुंच गया. इस स्पीड को बनाए रखने के लिए भारत को हर महीने 19.17 करोड़ टीकों की सप्लाई करनी होती. वहीं जुलाई में स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार सप्लाई 13.5 करोड़ खुराक होने की उम्मीद है. अब सात दिनों का औसत 12 जुलाई तक गिरकर केवल 34,2 लाख तक पहुंच गई. हालांकि, पिछले सप्ताह वैक्सीनेशन की स्पीड फिर से बढ़ी है लेकिन यह 26 जून के हाईएस्ट वैक्सीनेशन से कम है.

कम हुआ शहरी बनाम ग्रामीण का अन्तर
टीकाकरण के मामले में शहरी भारत की शुरुआत अच्छी रही. वहीं ग्रामीण आबादी वाले जिलों में 21 जुलाई को प्रति लाख जनसंख्या पर दी गई नई खुराक का सात दिन का औसत 2,799 था. वहीं शहरी जिलों के लिए यह संख्या 4,477 थी, जहां ग्रामीण आबादी का हिस्सा 40% से कम था. निश्चित तौर पर इस मोर्चे पर चीजें बेहतर हुई हैं. शहरी और ग्रामीण जिलों में सात दिन के औसत नए प्रति मिलियन का अनुपात 6 जून को 2.76 था, जबकि 21 जुलाई को 1.60 था.

अशोक विश्वविद्यालय में त्रिवेदी स्कूल ऑफ बायोसाइंसेज के निदेशक डॉ शाहिद जमील ने कहा कि वैक्सीनेशन की स्पीड में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच अंतर में कमी स्वागत योग्य है, लेकिन इस अंतर को और कम करने की जरूरत है. ऐसा इसलिए है, क्योंकि हाल के सीरो प्रीवलेंस सर्वे से पता चला है कि शहरी क्षेत्रों की तरह कोविड -19 संक्रमण ग्रामीण क्षेत्रों में भी आसानी से फैल सकता है.