राजनांदगांव। जिले में समर्थन मूल्य पर किसानों से खरीदे गए धान में फर्जीवाड़े की परतें लगातार खुलती जा रही हैं। छुरिया ब्लॉक के कुहीमाल और डोंगरगढ़ ब्लॉक के मोहारा के बाद अब डोंगरगढ़ क्षेत्र के बागरेकसा उपार्जन केंद्र में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और धान गबन का मामला सामने आया है। जांच में 52 लाख 57 हजार 786 रुपये मूल्य के 1696.06 क्विंटल धान का गबन पाए जाने से सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जांच में खुलासा हुआ है कि समिति के कर्मचारियों ने सुनियोजित तरीके से रिकॉर्ड में हेराफेरी कर धान को “सूखत” दिखाते हुए लाखों रुपये की गड़बड़ी की। मामले में समिति प्रबंधक नीलकंठ साहू, ऑपरेटर ओम कुमार यादव सहित अन्य कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
संयुक्त जांच दल द्वारा उपार्जन केंद्र बागरेकसा का भौतिक सत्यापन और ऑनलाइन रिकॉर्ड का मिलान किया गया। जांच में पाया गया कि केंद्र में कुल 1 लाख 64 हजार 169 बोरियों में 65 हजार 627.60 क्विंटल धान खरीदी गई थी।
रिकॉर्ड के अनुसार 29 हजार 501.46 क्विंटल धान राइस मिलर्स को दिया गया। 34 हजार 430.08 क्विंटल धान संग्रहण केंद्रों को भेजा गया। इस तरह कुल 63 हजार 931.54 क्विंटल धान का प्रदाय दर्शाया गया। ऑनलाइन रिकॉर्ड में 1696.06 क्विंटल धान शेष बताया गया था, लेकिन जब टीम ने मौके पर भौतिक सत्यापन किया तो न बोरियों में और न खुले में एक किलो भी धान मौजूद मिला।
सूखत के नाम पर फर्जीवाड़ा
जांच के दौरान समिति प्रबंधक और ऑपरेटर ने गायब धान को “सूखत” होना बताया। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मिलर्स को धान परिवहन के दौरान रैंडम वजन नहीं कराया गया। जांच टीम ने पाया कि धर्मकांटा में प्राप्त वास्तविक वजन दर्ज करने के बजाय काल्पनिक और फर्जी आंकड़ों की ऑनलाइन एंट्री की गई। इसी के जरिए 1696.06 क्विंटल धान को कागजों में “सूखत” दिखाकर गबन को छिपाने की कोशिश की गई।
कर्मचारियों पर होगी सख्त कार्रवाई
प्रशासन ने मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। जिले में लगातार सामने आ रहे धान खरीदी घोटालों के बाद अब अन्य उपार्जन केंद्रों की भी जांच तेज होने की संभावना है।




