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छत्तीसगढ़: धान खरीदी केंद्रों को हाथियों से बचाने लगाया गया करंट…फेंसिंग तार के संपर्क में आते ही लगता है जमकर झटका…दूसरी ओर मजदूर से लेकर किसानों में दहशत…

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महासमुुंद। खरीदी केंद्रों में हाथियों का दल जब आ धमके तब क्या होगा, यह चिंता हाथी प्रभावित सिरपुर क्षेत्र के खरीदी केंद्रों में सताने लगी है, क्योंकि पिछले चार-पांच महीनों से हाथियों ने खेत, खलिहानों में उत्पात मचाया है।

अब धान खरीदी केंद्र की बारी आ गई है। इसी समस्या को देखते हुए उप धान खरीदी केंद्र लहंगर में समिति के सदस्यों ने फड़ के अंदर हाथियों को जाने से रोकने के लिए ईआरबी तार का प्रयोग किया है।

जिसे खरीदी केंद्र के चारों ओर लगाया है, ताकि इसके करंट के झटके से हाथी खरीदी केंद्र के अंदर न घुस सकें, क्योंकि इसका प्रयोग ग्राम जोबा सहित आसपास के ग्रामीणों ने फसल बचाने के लिए अपने खेतों में किया था।

इससे हाथी उनके खेतों में नहीं जा रहे थे। सफल होने के बाद इसका प्रयोग खरीदी केंद्र में किया गया है।इस उप खरीदी केंद्र में हाथी प्रभावित छह गांव के किसान धान बेचने के लिए आते हैं। ज्ञात हो कि हाथी प्रभावित गांवों के किसान इन दिनों हाथियों के आतंक से सहमें हुए हैं।



खेतों व खलिहानों में हाथियों ने पिछले चार महीने में जमकर उत्पात मचाते हुए फसलों को नुकसान पहुंचाया है वहीं खलिहान में धान की रखवारी करते हुए दो को मौत के घाट भी उतार दिया है।

इसी वजह से ग्रामीणों को हर वक्त हाथियों से सामना न हो इसकी चिंता सताते रहती है। समिति ने ईआरबी तार लगाने किए 25 हजार खर्च समिति के प्रबंधक तोषराम चौधरी, अध्यक्ष किशन पटेल ने बताया कि धान खरीदी केंद्र जलकी का उप केंद्र लहंगर है।

यहां ईआरबी तार का जाल बिछाया गया है। जिसेे लगाने के लिए समिति ने खर्च 25 हजार रूपये खर्च किया है। इस खर्च की राशि शासन से नहीं मिली है। किसानों व धानों कीरखवारी के लिए स्वयं समिति ने खर्च किया है, ताकि किसानों का धान व रखवारी करने वाले चौकीदार सुरक्षित रहे।

उन्होंने बताया कि इस उप केंद्र में हाथी प्रभावित छह गांव लहंगर, खड़सा, पीढ़ी, मोहकम, गुडरूडीह एवं परसाडीह के किसान धान बेचने के लिए आते हैं। रविवार से खरीदी प्रारंभ हो गई है। इस सप्ताह 800 क्विंटल धान खरीदने के लिए 15 किसानों को टोकन जारी किया है।


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जानिए क्या है ईआरबी ई-एलीफेंट, आर, रिफ्लेक्ट, बी, बेरिकेट्स यानी हाथी विकर्षण घेरा। रिफ्लेंट के लिए सौर ऊर्जा पैनल एवं करंट प्रवाहित करने के लिए और चारों ओर घेरा करने के लिए जीआई तार का प्रयोग किया जाता है।

जीआई तार से क्षेत्र को चारो ओर घेर दिया जाता है। जिसमें करंट प्रवाहित करने के लिए तार को बैटरी से जोड़ते हैं। वहीं बैटरी को सोलर पैनल से जोड़ा जाता है, ताकि इसी पैनल के माध्यम से बैटरी लगातार चार्ज होते रहे। यदि हाथी इसके संपर्क में आता है तो, उसे जमकर झटका लगता है, जिससे हाथी दूर भागते हैं।

समिति के सदस्यों ने बैठक में लिया फैसला हाथी भगाओ फसल बचाओ समिति के सदस्य राधेलाल सिन्हा ने बताया कि हाथियों के उत्पात से ग्रामीण परेशान हैं। अब धान खरीदी प्रारंभ हो गई है। धान को खाने हाथी केंद्रों में घुस जाते हैं।

सबसे ज्यादा प्रभावित ग्राम लहंगर उप धान खरीदी केंद्र है, क्योंकि केंद्र में हाथियों का दल पूर्व में कई बार घुसकर उत्पात मचाया है। इस वर्ष हाथी केंद्र में न घुसे इसलिए ईआरबी तकनीक का सहारा लिया है।

समिति के अध्यक्ष व सदस्यों ने 21 नवंबर को बैठक आहूत कर तार लगाने का फैसला लिया था। खरीदी के पूर्व फड़ के चारों ओर ईआरबी तार का जाल बिछा दिया है। अब हाथियों का दल केंद्र में नहीं घुस पाएगा। इस तकनीक का प्रयोग पूर्व में कई गांवों के लोगों ने किया है। जहां ईआरबी बिछाया गया है, वहां हाथी नहीं जा रहे हैं।

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