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छत्तीसगढ़ : शिक्षा विभाग में फर्जी नौकरी की शिकायत के बाद तलब किए गए 570 शिक्षक… इन 5 शिक्षकों के दस्तावेज मिले फर्जी…अब…

कोरबा। फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर शिक्षा विभाग में नौकरी की शिकायत के बाद कोरबा विकासखण्ड अंतर्गत प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षकों/शिक्षाकर्मियों के दस्तावेज जांच हेतु तलब किये गये। कोरबा खण्ड से 570 शिक्षकों ने अपने दस्तावेज जमा कराये जिसकी जांच में 5 शिक्षकों के दस्तावेज फर्जी मिले हैं जो उन्होंने ज्वाइनिंग के समय प्रस्तुत किये थे।

इनमें 3 सहायक शिक्षक एलबी व 2 शिक्षक पंचायत शामिल हंै। अग्रिम कार्यवाही के लिए खण्ड शिक्षा अधिकारी ने जिला शिक्षा अधिकारी को प्रतिवेदन एवं पत्र प्रेषित कर दिया है साथ ही जनपद पंचायत कोरबा के सीईओ को भी जानकारी दी गई है।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, रायपुर से 2008 में जारी डिप्लोमा इन एजुकेशन कोर्स की तीन अंकसूची में सीरियल नंबर समेत प्राप्तांक व विषय के अंक एक समान थे।



इसी कई समानता वाले अंकसूची में से एक हरदीबाजार क्षेत्र के बिरदा निवासी खुमान प्रसाद राजवाड़े पिता सूर्यभान राजवाड़े को वर्ष 2011 में शिक्षाकर्मी वर्ग तीन के लिए जनपद पंचायत ने चयनित कर नियुक्ति प्राइमरी स्कूल धौंराभांठा में की।

इस दौरान यह बात भी सामने आई कि अनेक शिक्षाकर्मियों ने भर्ती के समय फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी हासिल ली है। इस संबंध में एक शिकायत पर बिलासपुर कमिश्नर द्वारा जांच के निर्देश दिये गये।



जनपद सीईओ ने खंड शिक्षाधिकारी एसके अग्रवाल की अध्यक्षता में गठित 5 सदस्यीय टीम से ज्वाइनिंग के समय दिए दस्तावेजों की जांच करने कोरबा ब्लाक के प्राइमरी स्कूल के सहायक शिक्षक एलबी व शिक्षक पंचायत के दस्तावेजों की जांच कराई।

निर्धारित तिथि तक 570 शिक्षकों ने दस्तावेज जमा किए जिनकी जांच में तीन सहायक शिक्षक एलबी खोड्डल के कंचन भारद्वाज, एलांग के धीरेन्द्र धिरही, भांठापारा की सुनीता महिलांगे के दस्तावेज फर्जी पाए गए। इसी तरह दो शिक्षक पंचायत चितरंजन कश्यप व खुमान प्रसाद के भी दस्तावेज फर्जी मिले। चितरंजन कश्यप जांजगीर-चांपा पुलिस द्वारा पिछले दिनों गिरफ्तार कर ले जाया जा चुका है।
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यहां यह भी उल्लेखनीय है कि कोरबा ब्लॉक के विभिन्न प्राइमरी स्कूल में 769 शिक्षक सेवारत हैं लेकिन 199 शिक्षक एलबी, शिक्षक पंचायत ने दस्तावेज जमा नहीं किया जिसके कारण इनके प्रमाण पत्रों की जांच नहीं हो पायी है।

सूत्रों के अनुसार कुछ अभ्यर्थियों ने शिक्षाकर्मी बनने दिव्यांग व अन्य प्रमाण पत्र फर्जी बनवाकर जमा किया व बोनस अंक प्राप्त किये। शिक्षाकर्मी वर्ग -3 की भर्ती के समय जमा किये गये दस्तावेजों का पुन: सत्यापन के दौरान 5 फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी सतीश कुमार पांडेय का कहना है कि कहीं न कहीं चयन समिति से यह चूक हुई है जिसकी वजह से इन अभ्यर्थियों ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी प्राप्त कर ली। जांच में अगर चयन समिति की लापरवाही सामने आती है तो संबंधितों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

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