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जानें प्रचंड जीत के बाद अब क्या कहती है मोदी की कुंडली…नहीं मिलेगा ये सुख….

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म तारीख 17 सितंबर 1950 को पूर्वाहन 11 : 00 बजे वाडनगर, गुजरात मे बताया गया। जिसके अनुसार वृश्चिक लग्न की कुंडली बनती है परंतु उनकी बायोग्राफी और पारिवारिक स्थिति के अनुसार तुला लग्न की जन्मपत्री प्रतीत होती है।

मोदी के जीवन पर ज्योतिषीय शोध के बाद कहा जा सकता है कि उनका जन्म 10:50 के पूर्व होना चाहिए, क्योंकि प्रधानमंत्री जी बाहरी तौर पर गंभीर व्यक्तित्व के और गहन विचारक प्रतीत होते हैं और आंतरिक तौर पर काफी गहरे दिमाग वाले और काफी गहन चिंतन वाले हैं।

यह स्वभाव सिर्फ शनि शुक्र की युति ही दे सकती है, जो तुला लग्न के अनुसार पंचमेश शनि का एकादश भाव में शुक्र के साथ पाया जाना और पंचम भाव पर दृष्टी का होना एक तार्किक गंभीर तथा गहरे दिमाग का परिचायक है।

[show_more more=”TEXT” less=”TEXT”]कुंडली के ग्रह भी देते हैं बड़े परिवार के संकेत
प्रधानमंत्री जी की पारिवारिक स्थिति की विवेचना करें तो उन्हें लेकर कुल चार भाई और एक बहन है। यह भी तुला लग्न से ही स्पष्ट होता है। तृतीयेश बृहस्पति का शतभिषा नक्षत्र में होना और कुंभ राशि में होना कुल पांच भाई बहनों का संख्या देता है।

इस जन्मपत्री में दशमेश चंद्रमा शनि के नक्षत्र में द्वितीय स्थान मे बैठा है और चतुर्थ स्थान का मालिक शनि भी शुक्र के साथ बैठा है। शनि शुक्र दोनों ही पांच नंबर की राशि में बैठे हैं, यहां से भी कुल पांच भाई-बहनों के संकेत मिलते क्योंकि चतुर्थेश शनि अपने स्थान से षडाष्टक होकर चतुर्थ से अष्टम बैठा है, अतः चतुर्थ भाव के लिए कारक ना होकर यहां बहन की संख्या के लिए मारक का कार्य करता है और एक संख्या प्रदान करता है साथ ही मंगल दशमेश चन्द्र युति चार भाई की संख्या का सूचक है। इस दृष्टि से भी तुला लग्न की कुंडली प्रधानमंत्री पर स्पष्ट प्रतीत होती है।

कुंडली में नही है वैवाहिक सुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैवाहिक जीवन पर बात करें तो सर्वविदित है कि प्रधानमंत्री जी की शादी तो हुई है पर वह अपनी पत्नी के साथ नहीं रहते हैं, अतः उन्होंने वैवाहिक जीवन का सुख नहीं प्राप्त किया। तो तुला लग्न की जन्मपत्री अगर देखें तो यहां पर भी सप्तमेश मंगल सप्तम से अष्टम स्थान पर चंद्रमा के साथ वृश्चिक राशि में पाया जा रहा है।

यहां भी यह मंगल सप्तम भाव के लिए मारक भूमिका निभाएगा। ऐसे में यहां यह बात स्पष्ट रुप से फलीभूत होती है कि इस जन्मपत्री में वैवाहिक सुख नहीं है। अतः यहां से भी तुला लग्न की जन्मपत्री अस्पष्ट रुप से फलित होती है।[/show_more]

इस कारण कठिनाइयों में बीता बचपन
जीवन में प्रधानमंत्री जी का जीवन आर्थिक कठिनाइयों और संघर्ष से भरा हुआ था। द्वादशस्थ सूर्य, द्वितीयस्थ मंगल और पंचमस्त गुरु की प्रबलता से प्रारम्भिक जीवन की कठिनाइयों को स्पष्ट दर्शाती है, क्योंकि एकादश भाव में शनि और शुक्र की युति उत्तरार्द्ध के जीवन में फलदाई होता है और यह उत्तरार्द्ध के जीवन में ही प्रबल होते हैं और यह दोनों ही ग्रह इस जन्मपत्री के लिए महत्वपूर्ण कारक ग्रह जैसे-जैसे 38-40 वर्ष की अवस्था प्रधानमंत्री जी ने पार की वैसे-वैसे जीवन में प्रगति रास्ते खुलते चले गए और उनकी लोकप्रियता और सफलता राजनीतिक जीवन में पकड़ बनाते गए।



जानें कब विरोधी होंगे सक्रिय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्मपत्री में मंगल 2022 के बाद काफी ज्यादा को प्रभावी होता नजर आ रहा है। उसकी प्रबलता विरोधियों की सक्रियता का सूचक है। साथ ही साथ नवांश में भी मंगल और बृहस्पति की प्रबलता प्रधानमंत्री के 72 साल की अवस्था के बाद काफी खराब स्थिति का सूचक है, जिसमें विरोधियों की काफी सक्रियता हो जाएगी, जो प्रधानमंत्री की छवि को खराब करने में काफी हद तक सक्षम भी होगी, लेकिन अभी प्रधानमंत्री की जन्मपत्री अपने मजबूती की चरमोत्कर्ष पर हैं और इस समय निरंतर सफलता की ओर बढ़ रही है।

इस कारण चमकेगा मोदी का सितारा
साल 2019 प्रधानमंत्री के लिए काफी अच्छा वर्ष है। यह वर्ष 2014 से भी अच्छा साबित हो सकता है। वर्ष कुंडली के अनुसार उनका मेष लग्न है और कुंडली के दसवें घर में मंगल की प्रबलता और छठे घर में सूर्य का मंगल से मूल त्रिकोण का संबंध स्थापित होना एक मजबूत शासक के रूप में दर्शाता है और आक्रामक और काफी सख्त निर्णय लेने वाला शासक के रूप में दर्शाता है। इस वर्ष कुंडली में अगर अकारक ग्रहों की बात करें तो सिंहस्थ बुद्ध काफी निर्बल अवस्था में है और धनु का शनि भी वह भी काफी निर्बल अवस्था में है दो-दो अकारक ग्रहो की यह निर्बल स्थिति प्रधानमंत्री जी को निर्विरोध सफलता की ओर ले जा सकती है।
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मोदी तब लेंगे कठोर निर्णय
इस वर्ष कुंडली का नवमांश की बात करें तो नवांशा मे दशम घर में गुरु की प्रबल स्थिति तथा यहां भी छठे घर में सूर्य का गुरु से मूल त्रिकोण संबंध बनाते हुए गुरु की प्रबलता को मजबूत करते हुए एक मजबूत शासक की स्थिति दर्शाती है। 17 सितंबर 2019 के बाद प्रधानमंत्री मोदी काफी मजबूत आत्मविश्वास के साथ आक्रामक और अप्रत्याशित फैसले लेंगे जो देश में ऐतिहासिक बदलाव लाएगा।

आने वाले दो साल तक यानी सितंबर 2022 तक प्रधानमंत्री जी जनहित के फैसलों के साथ कठोर निर्णय लेंगे, जिससे मूलभूत परिवर्तन देश के नियम-कानून में भी होगा। हालांकि मोदी का यह साहसिक और बोल्ड निर्णय का समय 2022 तक ही चल पाएगा।

जानें कब और किससे मिलेगी चुनौती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2019 से 2022 तक काफी सफल एवं लोकप्रिय शासक के रुप मे कार्य करेंगे, लेकिन सितम्बर 2022 के बाद उनका जबरदस्त विरोध होगा। उन पर बहुत सारे आरोप भी लगाए जा सकते हैं।

यहां तक कि उन्हें अपनों का अर्थात् पार्टी के भीतर से भी उठे सवालों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में 2022 से 2024 के बीच का समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए शुभ नहीं कहा जाएगा। यह समय उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण और तनावपूर्ण होगा।

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