छत्तीसगढ़

नल जल पर विवाद… मितानिनों ने किट से पानी जांचा तो मिला बैक्टीरिया; निगम ने उन्हीं स्थानों से सैंपल लेकर दोबारा लैब में करवाई जांच…

स्टेट हेल्थ रिसोर्स सेंटर (एचएसआरसी) ने हाल ही में राजधानी समेत 20 शहरों में नल व बोर से सप्लाई पानी की जांच किट से की थी। इसमें राजधानी में 6 फीसदी सैंपल मानक पर खरे नहीं उतरे थे। पानी में बैक्टीरिया था। जब यह रिपोर्ट नगर निगम के पास गई तो अधिकारियों ने इस रिपोर्ट की सत्यता को ही मानने से इनकार कर दिया।

ऐसे में निगम ने उन्हीं स्थानों से सैंपल लेकर दोबारा लैब में पानी की जांच करवाई है, जिसकी रिपोर्ट गुरुवार को आने की संभावना है। अधिकारियों का कहना है कि जिस किट से जांच हुई, उसमें पानी काला पड़ जाता है। इसमें कौनसा बैक्टीरिया है, पता नहीं चल पाता। पीएचई व निगम की मान्यता प्राप्त लैब है, जिसमें दोबारा पानी की जांच करवाई गई है।

एचएसआरसी राज्य शासन का ही एक विभाग है। जब पानी की शुद्धता की बात आई तो निगम ने जांच के तरीके पर ही सवाल उठा दिए। एचएसआरसी ने मितानिनों के माध्यम से नल व बोर के पानी की जांच करवाई थी। नगर निगम रायपुर से 978 सैंपल लिया गया था, जिसमें 58 सैंपल दूषित पानी मिला। यह कुल सैंपल का 6 फीसदी है।

जब सेंटर की रिपोर्ट नगरीय प्रशासन व विकास विभाग ने जारी की तो उनके ही मातहत नगर निगम ने रिपोर्ट की सत्यता पर सवाल उठाए। यही नहीं दोबारा उन इलाकों से पानी का सैंपल लेकर जांच करवाई गई है।

निगम के अधिकारियाें का कहना है कि मितानिनों ने जिस पानी की जांच की, वह नल व बोर दोनों का था। दोनों रिपोर्ट मर्ज कर दी गई थी, जो सही नहीं है। जिस एच2एस यानी हाइड्रोजन सल्फाइड पेपर किट से पानी की जांच की गई, वह भी वैध जांच नहीं है।

शीशी में पेपर किट, पानी का रंग हो जाता है काला
हाइड्रोजन सल्फाइड वाले पेपर किट से जांच करने से पानी दूषित है या नहीं, इसका पता चल जाता है। दरअसल एक छोटी सी शीशी में पहले से पेपर किट रहता है। शीशी में पानी डाल दिया जाता है। इसे 48 से 72 घंटे तक रखने पर अगर पानी का रंग काला हुआ तो इसे दूषित मान लिया जाता है। अगर पानी का रंग नहीं बदला तो यह शुद्ध माना जाता है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार तात्कालिक जांच के लिए बेहतर उपाय भी माना जाता है।

इकोलाई बैक्टीरिया से फैलता है डायरिया
इकोलाई बैक्टीरिया से डायरिया फैलता है। एक निजी अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. युसूफ मेमन व सीनियर मेडिकल कंसल्टेंट डॉ. सुरेश चंद्रवंशी के अनुसार इकोलाई बैक्टीरिया से मरीज सामान्य से गंभीर हो सकता है। यही नहीं मल के साथ खून भी जा सकता है। पेट में दर्द व मरोड़ भी हो सकता है। कुछ लोगों को मिचली व उल्टी भी आ सकती है। अगर ऐसे लक्षण हैं तो विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाने की जरूरत होती है।

राजधानी के इन इलाकों से लिया था मितानिनों ने सैंपल
गोंदवारा, बुनियादनगर, गोवर्धनगर, शिवाजीपारा, दुर्गानगर, लोधीपारा, शीतलापारा, कांपा, खमतराई, डूमरतालाब, जोरापारा, ललिता चौक, गांधीनगर, चंडीनगर, रजबंधा मैदान, मौदहापारा, विश्वकर्मा चौक, गंगारामनगर, ईदगाहभाठा, अवधियापारा, काशीरामनगर, न्यू पुरैना बस्ती, ब्रह्मदेवनगर, महात्मा गांधीनगर, गुरुमुख सिंह नगर, जोगीनगर, सोनकरपारा, हरदेवलाला मंदिर के पास सुदामानगर, रामनगर समेत 58 स्थानों से।