छत्तीसगढ़

मुश्किलों भरा सफर… अमरकंटक 5 घंटे लेट, गीतांजलि, आजाद हिंद एक्स. में 23 मई तक नो-रूम… बिना बुकिंग यात्रा भी नहीं…

शादी-ब्याह और छुटिट्यों के सीजन के चलते यात्री ट्रेनों में सफर मुश्किलों भरा हो गया है। लंबी दूरी की अधिकांश ट्रेनों में अगले 15 दिनों के अंदर स्लीपर में वेटिंग 150 के पार पहुंच चुकी है, वहीं एसी में 70 से ज्यादा वेटिंग है। ट्विनसिटी में बिहार और यूपी जाने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है।

वे सारनाथ, नवतनवा, गोंदिया-बरौनी जैसी ट्रेनों में यात्री वेटिंग टिकट लेकर सफर करने मजबूर हैं। यात्रियों के दबाव को देखते हुए रेलवे को दो दिन पहले दुर्ग-पटना एग्जाम स्पेशल ट्रेन चलानी पड़ी। इधर गीतांजली, आजाद हिंद, हावड़ा-अहमदाबाद, मेल जैसी ट्रेनों में अगले 18 मई तक नो-रूम के हालात हैं।

नाॅन इंटरलाकिंग और रैक पेयरिंग (सवारी गाड़ी के कोच की सफाई और स्टेशन आने में देरी) ने यात्रियों को परेशान कर दिया है। कोयले की कमी के चलते पहले ही लंबी दूरी की कई ट्रेनों को रद्द रखा गया है। रायपुर मंडल के वरिष्ठ प्रचार नियंत्रक शिव प्रसाद पंवार का कहना है कि अभी नाॅन इंटरलाकिंग का काम चल रहा है। गुड्स ट्रेनों के भी मूवमेंट बढ़े हैं। इसकी वजह से सवारी ट्रेनें प्रभावित हुई हैं।

तत्काल के लिए मची मारामारी, सुबह से लग रही कतारें
24 घंटे पहले ट्रेनों में तत्काल टिकट की सुविधा है। इसके लिए एसी टिकट के लिए सुबह 10 और स्लीपर के लिए 11 बजे टिकट काउंटर खोले जाते हैं। बावजूद इसके टिकट काउंटरों में सुबह 6 बजे से ही लाइन लग रही है। आसपास के स्टेशनों में बालोद, दल्लीराजहरा जैसे स्टेशनों में भी लोग जाकर तत्काल की टिकट करवा रहे हैं। हालांकि व्यक्तिगत रूप से ऑनलाइन टिकट बनाई जा सकती है, बावजूद काउंटर में लोग जुट रहे हैं। ताकि उन्हें कन्फर्म टिकट मिले, लेकिन वह भी नहीं मिल पा रहा।

खड़गपुर स्टेशन में तीसरी लाइन का काम
खड़गपुर रेलवे स्टेशन में तीसरी लाइन का काम चल रहा है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के कुछ स्टेशनों का अपग्रेडेशन भी किया जा रहा है। इसकी वजह से एक दर्जन से अधिक एक्सप्रेस, मेल, सुपरफास्ट, मेमू और पैसेंजर ट्रेनों को रद्द किया गया है।

कुछ ट्रेनों को देरी से चलाया जा रहा है तो कुछ ट्रेनों को परिवर्तित मार्ग से। इसके कारण भी यात्रियों को परेशानी हो रही है। सबसे अधिक दिक्कत दैनिक यात्रियों को हो रही है। उन्हें निजी वाहन, टैक्सी या फिर बसों से दफ्तर से आना-जाना करना पड़ रहा है।