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शेयर बाजार में 7 महीने की सबसे बड़ी गिरावट!.. एक ही घंटे में निवेशकों के 5.59 लाख करोड़ रूपए हुए स्वाहा…

सेंसेक्स में आज करीब 1,300 अंकों की गिरावट आई है. सेंसेक्स अभी 57,472 डॉलर पर मौजूद है. जबकि निफ्टी शुक्रवार को अभी 17,130 अंकों के करीब है.
इस गिरावट से आज शेयर बाजार में निवेशकों को 5.59 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

कोटक बैंक और HDFC दोनों में 2 फीसदी की गिरावट देखी गई है. इसके साथ आज नजर RIL के शेयरों पर भी है. अरामको के साथ रिलायंस की डील रद्द होने के बाद कंपनी के शेयरों पर सभी नजर बनाए हुए हैं.

इस बीच एशियाई शेयर इस हफ्ते अपने दो महीनों में सबसे बड़ी गिरावट के करीब पहुंच गए हैं. वहीं, सेफ-हेवन एसेट्स जैसे बॉन्ड और येन में तेजी देखी गई है. इसकी वजह नए वायरस के वेरिएंट के आने से भविष्य में ग्रोथ को लेकर चिंताएं और अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें हैं. सुबह 10 बजे के समय पर, करीब 972 शेयरों में तेजी आई है. 1830 शेयरों में गिरावट है, जबकि 93 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है.

Tarsons प्रोडक्ट्स 3% प्रीमियम के साथ लिस्ट हुआ
बड़ी लाइफ साइंसेज कंपनी Tarsons प्रोडक्ट्स ने शुक्रवार को शेयर बाजार पर अपना डेब्यू किया है. NSE पर इसका शेयर 682 रुपये प्रति स्टॉक पर 3 फीसदी प्रीमियम पर लिस्ट हुआ है. इसका आईपीओ इश्यू प्राइस 662 रुपये प्रति शेयर है. BSE पर Tarsons Products के शेयर 708 रुपये प्रति शेयर पर ट्रेड कर रहे थे.

शेयर बाजार के जानकारों के मुताबिक, भारतीय बाजार पिछले दिन दक्षिण अफ्रीका में सामने आए कोरोना के नए वेरिएंट पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. इसके पीछे वजह कुछ यूरोपीय यूनियनों में लॉकडाउन का माहौल बनना है. ट्रेडर्स डर में ज्यादा जोखिम वाले एसेट्स जैसे इक्विटीज की बिक्री कर रहे हैं, जिसका नतीजा है कि FII से इक्विटी आउटफ्लो बढ़ रहा है.

एक्सपर्ट्स के मुताबिक निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारत के शेयर बाजार में निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है और निवेशकों को इस सेलऑफ को खरीदारी के मौके पर देखना चाहिए. उन्होंने कहा कि नया वेरिएंट भारतीय निवेशकों के लिए बड़ी चिंता की बात नहीं होनी चाहिए.

जोखिम का क्षमता रखने वाले निवेशकों को बाजारों में और पैसा लगाना शुरू करना चाहिए, अगर उन्होंने पहले तेजी पर नहीं किया था.
शेयर बाजार के जानकारों का कहना है कि भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के पीछे कमजोर एशियाई मार्केट्स भी हैं. ट्रेडर्स को WHO द्वारा नए कोरोना के वेरिएंट को लेकर सतर्क करने के बाद चिंता है. इनमें कुछ डर इसलिए भी है कि ICRA की रिपोर्ट में बुरे कर्ज की बात की गई है. और अग्रेडेशन के नियमों से देश में नॉन-बैंकिंग फाइेंस कंपनियों (NBFCs) के नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स में बढ़ोतरी हो सकती है.