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…तो क्या रेलवे अब अपने 94 स्कूलों को बंद करेगा! जानिए क्या है पूरा प्लान

देश भर में रेलवे के स्कूलों पर ताला लगने वाला है. भारतीय रेल अपने कर्मचारियों के बच्चों के पढ़ाई लिखाई के लिए देश भर में स्कूलों का निर्माण किय़ा था. लेकिन अधिकतर कर्मचारियों के बच्चे रेलवे के स्कूलों में नहीं पढ़कर नीजि स्कूलों में पढ़ रहे हैं. ऐसे में रेलवे ने इन स्कूलों को बंद करके वहां पीपीपी मॉडल पर नए स्कूल बनाने का फैसला किया है.टीवी9 भारतवर्ष को मिले दस्तावेज के मुताबकि वित्त मंत्रालय के प्रिंसिपल इकोनॉमिक एडवाइजर संजीव सान्याल ने रेलवे में कुछ बदलाव को लेकर रिपोर्ट के तौर पर कई सुझाव दिए हैं. जिनमें रेलवे के स्कूलों को बंद करके उसकी जगह पीपीपी मॉडल और केन्द्रीय विद्यालय के अधीन चालने की सिफारिश है. इस रिपोर्ट को भारत सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय (कैबिनेट सेक्रेटेरिएट) ने रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को भेजा है.

क्या है सुझाव
संजीव सान्याल ने जो रिपोर्ट तैयार की है उसके अनुसार देश भर में रेलवे के तमाम स्कूलों को तर्कसंगत करने का सुझाव हैं. इन सुझावों में मुख्य रुप से यह देखना है कि रेलवे के द्रावा चलाए जा रहे स्कूलों की स्थिति क्या है. इन स्कूलों में कितने बच्चटे रेलवे के और कितने बाहरी बच्चे पढते हैं. यदि इन स्कूलों को पीपीपी मॉडल पर चालया जाए तो उसकी रुपरेखा क्या होगी. इसके साथ ही रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को कहा गया है कि इन सुझावों पर लिए गए फैसले से हर महीने की 5 तारीख से पहले अवगत कराएं.

रेलवे के स्कूलों की मौजूदा स्थिति
संजीव सान्याल के द्वारा मुहैया की गयी रिपोर्ट के अनुसार देशभर में रेलवे के कुल 94 स्कूल हैं. जिसमें कर्मचारी से लेकर बाहर के लोगों के बच्चे पढ़ सकते हैं. साल 2019 में रेलवे कर्मचारियों के 15,399 बच्चों ने दाखिला लिया. जबकि बाहर के 34,277 बच्चों ने इन स्कूलों में दाखिला लिया. रेलवे 87 केंद्रीय विद्यालय को सहायता प्रदान करती है जिनमें 33, 212 रेलवे के और 55,386 बाहर के बच्चे पढ़ाई करते हैं. रेलवे कर्मचारियों के 4 से 18 साल तक के लगभग 8 लाख बच्चे हैं जबकि इनमें से महज़ 2% बच्चे ही रेलवे के स्कूलों में पढ़ते हैं.

ऐसे बेहतर हो सकते हैं स्कूल
अपनी रिपोर्ट में रेलवे के स्कूलों को कैसे बेहतर किया जाए इसे लेकर कई तरह के सुझाव दिए गए हैं. इनमें स्कूलों की संख्या कम से कम की जाए और वहीं स्कूल रेलवे चलाए जहां की बाकी स्कूल रेलवे कॉलोनी के पास नहीं हैं. जहां जरूरत लगे रेलवे के स्कूलों को केंद्रीय विद्यालय संगठन के तहत लाया जाए. जहां रेलवे कर्मचारियों के बच्चों के लिए कोटा हो. रेलवे के स्कूल राज्य सरकारों को भी चलाने के लिए दिए जा सकते हैं पर वहां भी कर्मचारियों के बच्चों के लिए कोटा को. साथ ही, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर रेलवे के स्कूल को चलाने की सिफारिश की गयी है.

कर्मचारी कर रहे विरोध
वित्त मंत्रालय के इन सिफारिशों का आल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन विरोध कर रहा है. फेडरेशन के महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा ने टीवी9 भारतवर्ष से बातचीत में कहा कि हमने सरकार को हमने अपनी बात कहने का काम किया है कि हमारी जो सुविधाएं हैं ऐसे ही बहुत कम है उनकी अगर छीनने का प्रयास होगा . उनके निजीकरण का प्रयास होगा तो ऑल इंडिया मेंस फेडरेशन खुले तौर पर संघर्ष के लिए तैयार है. इनका प्राइवेटाइजेशन नहीं होना चाहिए बल्कि सुविधाएं बढ़ाई जानी चाहिए.