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पूर्व गृहमंत्री के खिलाफ ED की कार्रवाई तेज… CBI से मांगी मदद…

मुंबई: 100 करोड़ की वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपों में घिरे महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के ख़िलाफ़ अब प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है. ईडी ने केंद्रीय अन्वेषण विभाग से अनिल देशमुख को ढूंढने में मदद मांगी है. ईडी द्वारा अनिल देशमुख को बार-बार समन भेजने के बावजूद पूछताछ के लिए हाजिर नहीं होने की वजह से यह कार्रवाई की गई है.

इससे पहले देशमुख के वकील आनंद डागा और सीबीआई निरीक्षक अभिषेक तिवारी को कोर्ट ने दो दिनों की सीबीआई कस्टडी सुनाई थी. इन पर देशमुख के खिलाफ जांच की रिपोर्ट को लीक करने का आरोप लगा था.

उस लीक हुई रिपोर्ट के आधार पर अनिल देशमुख के निर्दोष साबित होने की खबर फैलाई गई थी. पिछले हफ्ते ही सीबीआई ने इन दोनों को अरेस्ट किया था. तिवारी देशमुख के वकील डागा के संपर्क में थे और उन्हें सीबीआई की रिपोर्ट से जुड़ी जानकारियां लीक कर रहे थे.

बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद अनिल देशमुख ईडी कार्यालय में पूछताछ के लिए हाजिर नहीं हो रहे हैं. इस वजह से जो जानकारी निकल कर सामने आ रही है उसके मुताबिक अब ईडी और सीबीआई मिलकर राज्यभर में अलग-अलग ठिकानों पर देशमुख को खोजने के लिए छापेमारी करने वाली है.

ऐसे में अनिल देशमुख की मुश्किलें अब और बढऩे वाली हैं. इससे पहले ईडी अनिल देशमुख से संबंधित नागपुर और मुंबई के आस-पास 13-14 ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है.

अनिल देशमुख ने महाराष्ट्र के गृहमंत्री पद से इस्तीफा देते हुए यह कहा था कि वे सीबीआई और ईडी द्वारी की जाने वाली पूछताछ में पूरा सहयोग करेंगे. लेकिन इस्तीफा देने के बाद कहानी पलट गई. इसके बाद उन्होंने कभी इन जांच एजेंसियों को सहयोग नहीं दिया.

कभी समन के जवाब में सेहत, कोरोना और उम्र का हवाला देकर हाजिर नहीं हुए. कभी वकील से जवाब भेजवा दिया और सवाल किया कि पहले उन्हें बताया जाए कि स्पेसिफिकली उनसे किस सिलसिले में पूछताछ करनी है.

कभी उनकी तरफ से हाईकोर्ट में केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा जांच किए जाने पर ही सवाल उठाया गया. फिर वे सुप्रीम कोर्ट चले गए और अपने खिलाफ जांच रोके जाने की अपील करने लगे. ऐसे में समन का जवाब उन्होंने यह कह कर भेजवाया कि कोर्ट में उन्होंने याचिका दी हुई है. जब तक सुनवाई शुरू है, तब तक किस हक से ईडी उन्हें समन भेजवा रही है.

लेकिन अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में देशमुख द्वारा की गई कोशिश नाकाम हो चुकी है. सर्वोच्च न्यायालय ने देशमुख की दलील को सिरे से ठुकरा दिया है. इसके बाद अनिल देशमुख कहां हैं, यह किसी को पता नहीं है.