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जानें क्या हैं भारत में पोर्नोग्राफी के कानून, किस तरह दंड के प्रावधान

File Photo

भारत (India) के मशहूर बिजनेस मैन और अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा (Raj Kundra) पोर्नोग्राफी (Pornography) के मामले में गिरफ्तार हो गए हैं. पुलिस का दावा है कि उनके पास कुंद्रा के खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं. उन्हें अश्लील फिल्म बनाने और उन्हें प्रकाशित करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. बताया जा रहा है कि राज ने दुबई में अपना ऑफिस बनाया था और पिछले साल के अंत में इस कंपनी से खुद को अलग भी कर लिया था, लेकिन वे फिर भी क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ गए. आइए जानते हैं भारत में पोर्नोग्राफी कानून क्या है और उसके दंड के प्रवाधान क्या हैं.

क्या कानून है इसके लिए
साइबर पोर्नोग्राफी कानून जिसके तहत राज कुंद्रा पर आरोप लगे हैं, वह कानून है जिसमें साइबरस्पेस का उपयोग कर या उसके जरिए अश्लील सामग्री बनाने, दिखाना, वितरित करना, आयातित करना, या प्रकाशित किया जाता है. साइबर स्पेस के आसने से परंपरागत अश्लील कंटेट बड़े पैमाने पर ऑन लाइन या डिजिटल पोर्नोग्राफिक कंटेट में बदल गई है.

साल 2000 के कानून का प्रावधान
साइबर पोर्नोग्राफी कई देशों में बैन है और कई देशों में वैध भी है. भारत के सूचना तकनीकी कानून 2000 के अंतर्गत यह कानून का वह काला हिस्सा है जहां ना तो यह प्रतिबंधित है और ना ही वैध है. इसी कानून की धारा 67 के तहत बहुत से कार्य दंडनीय अपराध की श्रेणी में हैं जिसमें तीन साल के कारावास और 5 लाख रुपये जुर्माना तक का प्रावदान हैं.

प्रकाशन या प्रसारण
इस कानून में प्रकाशन का के तहत वेबसाइट पर सामग्री अपलोड करना, व्हाट्सऐप ग्रुप या किसी अन्य डिजिटल पोर्टल पर अपलोड करना जहां थर्ड पार्टी इस तरह के कटेंट को देख सकती हैं. इसके प्रसारण में ईमेल, मैसेजिंग, व्हाट्सऐप या किसी व्यक्ति को किसी भी तरह के डिजिटल मीडिया में अश्लील तस्वीरें, वीडियो या तस्वीरें भेजना शामिल है.

प्रकाशन या प्रसारण में कारण होना
इतना ही नहीं अगर कोई व्यक्ति इस तरह के प्रकाशन या प्रकाशन में कारण बनता है तो वह भी इस कानून के मुताबिक दंडात्मक कार्रवाई के योग्य माना जाएगा. इसमें उन पोर्टल के संचालक भी इस कानून के दायरे में आ जाएंगे जिनके जरिए अश्लील सामग्री प्रकाशित या प्रसारित हुई है. सूचना तकनीक कानून की इंटरमीडियरी दिशानिर्देशों के तहत इंटरमीडियरी/सेवा प्रदाता की खुद की जिम्मेदारी बनती है कि वे सुनिश्चित करें कि उनके पोर्टल का इन कार्यों के लिए दुरुपयोग नहीं हो.

कानून की कमियां?
लेकिन इस कानून के कुछ अन्य पहलू भी हैं जिन पर गौर करने की जरूरत है. इस कानून के प्रवाधान भारत में पोर्नोग्राफी के बारे में स्पष्ट रूप के दर्शाते हैं कि साइबर पोर्नोग्राफी भारत में गैरकानूनी नहीं है. केवल डाउनलोड करना और इन्हें देखना अपराध की श्रेणी में नहीं रखा गया है. लेकिन अगर उस कंटेंट में बच्चे शामिल हैं तो ऐसे कंटेंट को देखना, डाउनलोड करना अपराध कीश्रेणी में जिसमें 5 साल की जेल और 10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है. बेशक अश्लील सामग्री को ऑनलाइन प्रकाशित करना अवैध है और कानूनी रूप से दंडात्मक है. लेकिन इस कानून की कमजोरी यह है कि साइबर पोर्नोग्राफिक कंटेट स्टोर कर रखना अपराध नहीं हैं.

फिर भी यह अपराध है कि
कुछ कमजोरियों के बाद भी इस कानून में यह प्रावधान है कि साइबर पोर्नोग्राफी को मैसेजिंग, ईमेल या अन्य माध्यमों के जरिए डिजिटल प्रसारण अपराध है. हाल ही में एक 21 साल का इंजीनियरिंग छात्र एक महिला को अश्लील तस्वीरें भेजने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. ऐसे मामले भी सामने आ चुके हैं जब किसी पोर्टलके प्रमुख को इस आरोप में गिरफ्तार किया गया जब उनके पोर्टल के जरिए अश्लील सामग्री भेजी गई.

यहां गौर करने वाली बात है कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी पूरी दुनिया में गैरकानूनी है और भारत में भी इस पर सख्त कानून है. भारत में साइबर पोर्नोग्राफी वैध नहीं हैं. इसका मतलब केवल इसकी ब्राउजिंग से है. लेकिन फिर भी सरकर को इस पर भी सख्त होने की जरूरत है क्योंकी पोर्नोग्राफी हर रूप में गलत और समाज के साथ व्यक्ति की मानसिक सेहत के लिए भी बहुत नुकसानदेह है.

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