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घरों का राशन होने लगा खत्म, होम डिलीवरी के बहाने बढ़ने लगी मुनाफाखोरी, रात में थोक बाजार के विरोध में व्यापारी

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रायपुर। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते बीते माह नौ अप्रैल से लगाए गए लॉकडाउन की वजह से पूरे व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद हैं। फल, सब्जियों के साथ ही किराना दुकानें व सुपर बाजार भी बंद हैं। लॉकडाउन लगे हुए करीब माह भर होने को है और ऐसे में घरों का राशन भी खत्म होने लगा है। जिला प्रशासन ने लोगों की सुविधा के नाम पर होम डिलीवरी शुरू तो की है, लेकिन इन दिनों होम डिलीवरी के नाम पर मुनाफाखोरी बढ़ने लगी है।

फलों की कीमतों में जहां अभी भी आग लगी हुई है। वहीं, खाद्य तेलों की कीमतों में भी बढ़ोतरी होने लगी है। बड़ी-बड़ी कंपनियों के पास होम डिलीवरी की अनुमति न होने से उनके पास होम डिलीवरी वालों की सुची अटकी हुई है और वे ग्राहकों को यह मैसेज करने में लगे हुए है कि लॉकडाउन खुलते ही उनके पास सामान पहुंचेगा। लोगों की इन समस्याओं को देखने के बाद भी प्रशासन बिल्कुल शांत बैठा हुआ है।

यह आ रही मुख्य परेशानी
होम डिलीवरी के लिए अलग से कारोबारियों ने संस्थानों के बाहर नंबर नहीं चस्पा किए गए हैं कि इन नंबरों पर कॉल करके आप होम डिलीवरी से जरूरत का सामान मंगवा सकते हैं। साथ ही उन्हें दुकानें खोलने की भी अनुमति नहीं है। इस वजह से चोरी छिपे सामान बेचा जा रहा है और कुछ वस्तुओं की तो मुनाफाखोरी भी शुरू हो गई है।

बाजार में फिर से डर का माहौल
बाजार में इन दिनों लॉकडाउन बढ़ने के बार-बार समाचार आने की वजह से थोड़ा डर का माहौल भी बनता जा रहा है। होम डिलीवरी करने वाले कारोबारियों का कहना है कि महीने का राशन खत्म होने की वजह से उपभोक्ताओं के ऑर्डर भी बढ़ते जा रहे हैं।

रात में थोक बाजार के विरोध में व्यापारी
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि भले ही फुटकर विक्रेताओं के पास सामान पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन ने रात में 11 बजे से चार बजे तक थोक बाजार खोलने की अनुमति दी है। मगर, इसने परेशानी और बढ़ी है। थोक सब्जी व्यावसायी संघ के अध्यक्ष टी श्रीनिवास रेड्डी का कहना है कि कारोबार आधे से भी कम हो गया है। कांग्रेस व्यापार प्रकोष्ठ के अध्यक्ष राजेन्द्र जग्गी ने भी समय में बदलाव को लेकर जिला प्रशासन को पत्र लिखा है।