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सिडनी टेस्ट: पेन किलर्स की ओवर डोज लेकर मैदान में डटे थे पंत और हनुमा विहारी…

भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच सिडनी टेस्ट ड्रॉ रहा, लेकिन टीम इंडिया ने कई खिलाड़ियों की इंजरी के बावजूद बेहतरीन प्रदर्शन किया. जब ऑस्ट्रेलिया ने सिडनी में भारत को 407 रनों का टारगेट दिया था, उस समय भारत के लिए मैच को बचाना मुश्किल लग रहा था. चौथे दिन के खेल समाप्त होने तक भारत का स्कोर 2 विकेट पर 98 रन था. उस समय ये तय नहीं था कि ऋषभ पंत और जडेजा मैच में क्या प्रभाव डालेंगे क्योंकि पंत को कोहनी और जडेजा को बाएं अंगूठे में चोट लगी हुई थी. भारत को एक और झटका तब लगा जब हनुमा विहारी की मांसपेशियों में खिंचाव आ गया.

वहीं, ऋषभ पंत ने सुबह के सत्र में अपना दमखम दिखाया. पंत ने दर्द के बावजूद 118 गेंदों में 97 रनों की यादगार पारी खेली. पंत ने 97 रनों की पारी में 12 चौके और 3 छक्के लगाए. उन्हें पहली पारी में कमिंस की गेंद पर बायीं कोहनी में चोट लग गई थी. पंत कप्तान रहाणे के आउट होने के बाद बैटिंग करने आए थे. पंत को विहारी से पहले बैटिंग करने भेजा गया था.



पंत के आउट होने के बाद हनुमा विहारी बैंटिग करने आए. ऑस्ट्रेलिया ने इसके बाद नई गेंद ले ली. कुछ समय बाद ही चेतेश्वर पुजारा 77 रन बनाकर आउट हो गए. पंत और पुजारा के विकेट ने भारत की जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया था. मैच में अब भी 40 से ज्यादा ओवर बचे थे और भारत के लिए मैच ड्रॉ करना आसान नहीं था, लेकिन हनुमा विहारी और रविचंद्रन अश्विन ने 256 गेंद खेलकर मैच ड्रॉ करवा दिया. हनुमा और अश्विन दर्द के बावजूद मैच के अंत तक डटे रहे.

सूत्रों के मुताबिक, ऋषभ पंत और हनुमा विहारी ने 5वें दिन चोट के चलते हो रहे दर्द को कम करने के लिए पेन किलर्स की ओवरडोज ली. दोनों खिलाड़ी काफी दर्द में थे, लेकिन उन्होंने टीम के लिए खेलना जारी रखा. ब्रेक के दौरान हनुमा विहारी पेन किलर्स लेते भी दिखे.

5वें दिन भारत की ड्रेसिंग रूम का माहौल सामान्य था. खिलाड़ियों को कहा गया कि वे समय, ओवर और दर्द को भूल जाएं और हर गेंद को मिनी बैटल की तरह लें. टीम इंडिया ने वैसे ही किया. ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने सबकुछ आजमाकर देख लिया, लेकिन वो जीतने में कामयाब नहीं हो पाए.